Wednesday, 26 January 2022

मैं हूं साड़

मैं सांड़ हूं , लोग कहते हैं कि मैं तुम्हारी फसल उजाड़ रहा हूँ , सड़कों पर कब्जा कर रहा हूँ ,मैं तुम मनुष्यों से पूंछता हूँ कि कितने कम समय में मैं इतना अराजक हो गया,मे तो हजारो वर्षो से तुम्हारे पूर्वजों की सेवा करता आया हू ! मैं मनुष्यों का दुश्मन कैसे बन गया ।


अभी कुछ सालों पहले तो लोग मुझे पालते थे ,चारा देते थे , लेकिन मनुष्य ज्यादा सभ्य हो गया ट्रैक्टर ले आया ,पम्पिंग सेट से पानी निकालने लगा और मुझे खुला छोड़ दिया , मैं कहाँ जाता ? कहाँ चरता ? मनुष्य ने चरागाहों पर कब्जा कर लिया , अब पापी पेट का सवाल है  अपने पेट के लिए अपने मित्र मनुष्य से संघर्ष शुरू हो गया ।
यहां तक कि कुछ लोगों ने अपना पेट भरने के लिए मुझे काटना भी शुरू कर दिया ,मैं फिर भी चुप रहा ,चलो किसी काम तो आया तुम्हारे ।मेरी माँ ने मेरे हिस्से का दूध देकर तुम्हे और तुम्हारे बच्चों को पाला लेकिन अब तो तुमने उसे भी खुला छोड़ दिया ।
इधर पिछले सालों से कई मनुष्य मित्रों ने मुझे कटने से बचाने के लिए अभियान चलाया , लेकिन जब मैं अपना पेट भरने गलती से उनकी फसल खा गया तो वही मित्र मुझे बर्बादी का कारण बताने लगे , शायद अब यही चाहते हैं कि मैं काट ही दिया जाता ।
मित्र बस इतना कहना चाहता हूं कि मैं तुम्हारी जीवन भर सेवा करूंगा तुम्हारे घर के सामने बंधा रहूँगा ,थोड़े से चारे के बदले तुम्हारे खेत जोत दूंगा , रहट से पानी निकाल दूंगा , गाड़ी से सामान ढो दूंगा , बस मुझे अपना लो 
लेकिन क्या मेरे इस निवेदन का तुम पर कोई असर होगा ?
अरे तुम लोग तो अपने लाचार मां बाप को भी घर से बाहर निकाल देते हो , फिर मेरी क्या औकात..??

Monday, 17 January 2022

मैं हु उत्तर प्रदेश

मैं हूँ उत्तर प्रदेश l नाम तो मेरा सुना ही होगा l देश की उत्तर दिशा में बसता हूँ मैं l मेरे पूर्व में बिहारझारखण्ड, पश्चिम में हरियाणा और दिल्ली, उत्तर में उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश तथा दक्षिण में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्य हैं l  की सबसे अधिक जनसँख्या (लगभग २५ करोड़) वाला राज्य मैं ही हूँ l यही वजह है कि यहाँ होने वाले घटनाक्रमों का सीधा असर दिल्ली तक होता है
यह मेरा सौभाग्य है कि प्रकृति ने मुझे भरपूर प्रेम और ममता प्रदान की l उत्तराखंड से निकलने वाली गंगा, यमुना, रामगंगा  मेरी धरा को अपने अमृत से सींचते हुए, मैदानों को उपजाऊ बनाती हैं l घाघरा, चम्बल, बेतवा, सोन, गंडक, सरयू नदियों से सिंचित  क्षेत्रों में भरपूर अन्न का उत्पादन होता है l चावल, मक्का, गेंहूं, मटर, सरसों के साथ गन्ना सबसे अधिक पैदा होने वाली फसल है l 
मेरे अंदर ७५ जिले बसते हैं, जिसमें लखीमपुर सबसे बड़ा जिला है l मेरी पुरानी पहचान “अवध” को अब तक संभाले हुए है मेरा दिल यानी लखनऊ, जो मेरी राजधानी भी है l गंगा- जमुनी संस्कृति की धरोहर को समेटे यह शहर कला और शिल्प का नायाब उदाहरण है l भूलभुलैया, रूमी दरवाजा, घंटाघर, इमामबाड़ा मुग़ल स्थापत्य कला के आकर्षक नमूने हैं तो ,आगरा का ताजमहल इस कला का सिरमौर , जिसने विश्व भर को सम्मोहित कर रखा है l गंगा, यमुना और सरस्वती के मिलन का साक्षी है प्रयागराज, जहाँ स्नान करने के लिए दूर दूर से लोग आते हैं और संगम में डुबकी लगा कर तृप्त हो जाते हैं l 
यदि मैं वाराणसी का जिक्र न करूं तो बात अधूरी रह जाएगी l सारनाथ, काशी विश्वनाथ मंदिर और प्रसिद्ध गंगा घाट लोगों को आकर्षित करने के लिए पर्याप्त हैं l और अब तो मेरे अस्तित्व को प्रतिष्ठा को बढ़ाने के लिए अयोध्या में भव्य राम मंदिर बन रहा है l यह सिर्फ मेरे लिए ही नहीं, अपितु पूरे देश के लिए सम्मानित कदम है l ऐसे ही मथुरा, वृन्दावन,, दुधवा टाइगर रिज़र्व …….अनगिनत स्थान हैं जिन्होंने मेरी साख बढ़ाई है l 

मेरे यहाँ बनने वाले पकवानों का स्वाद तो विश्व भर में लोगो की जुबान पर है l चाहे वह लखनऊ के टुंडे के कबाब हो, मलीहाबाद के दशहरी आम, प्रयागराज की गरमागरम जलेबी- रबड़ी, बलिया का लिट्टी चोखा, मथुरा के पेड़े, आगरा का पेठा, बटोही के रसगुल्लों के साथ मेरी गुझिया, रसमलाई, कुल्फी, खीर और बनारसी पान तो लाजवाब है l मेरे व्यंजनों ने तो सबको चटखारे लेने पर मजबूर कर दिया है l 

 अपने यहाँ की कलाओं के बारे में मैं क्या कहूं, हर कोई इनका मुरीद है l 
मेरे यहाँ विकसित हुई चिकनकारी ने तो पूरी दुनिया में मेरी शान बढ़ाई है l मलमल के कपड़ों पर रंगीन धागों के महीन जाल में सभी बंध कर रह गए हैं l 
किसी भी नवयौवना के विवाह की तैयारी बनारस की बनारसी साड़ियों के बगैर पूरी नहीं होती है तो फिरोजाबाद की रंग बिरंगी कांच की चूड़ियां अनगिनत कलाईयों पर सजती हैं l मुरादाबाद के पीतल के बर्तन, खुर्जा के मिटटी के बर्तन लोगों की पहली पसंद हैं तो भदोही और मिर्ज़ापुर के खूबसूरत कालीन की जादुई दुनिया से भला कौन बच सका है l 

  मेरे रग रग में बसी है कला l कत्थक, रसिया, चारकुला और ब्रज रासलीला ने जगह जगह मेरी संस्कृति का रंग बिखराया है l उस्ताद बिस्मिल्लाह खान, बिरजू महाराज, चंदू महाराज, तीजनबाई ….न जाने कितने ही कलाकारों ने विदेशों तक मेरे नाम की धूम मचाई है l मुंशी प्रेमचंद, कबीरदास , तुलसी दास, सूरदास, जय शंकर प्रसाद,महादेवी वर्मा , मैथिली शरण गुप्त, हरिवंश राय बच्चन, भारतेंदु हरिश्चंद जैसे प्रकांड साहित्यकारों ने राज्य भाषा हिंदी को अपनी लेखनी से उन्नति के चरम शिखर तक पहुँचाया है l इंदिरा गाँधी, लाल बहादुर शास्त्री, चंद्रशेखर आज़ाद, अमिताभ बच्चन सहित बहुत सारी हस्तियों ने अपनी कुशल प्रतिभा से मेरी गरिमा में चार चाँद लगाया है lयहाँ पर पंडित मोतीलाल नेहरु, पंडित जवाहर लाल नेहरु, पुरषोत्तम दास टंडन, लाल बहादुर शास्त्री, विश्वनाथ प्रताप सिंह, चंद्रशेखर, राजीव गाँधी और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे प्रतिष्ठित राजनेताओं ने देश की राजनीति में महतवपूर्ण भूमिका निभायी l यही वजह है की दिल्ली तक पहुँचने का रास्ता यहीं से होकर गुजरता है l यही मेरा परिचय है l 
 मुझे और भी बेहतर तरीके से जानने के लिए प्रतिदिन मेरे साथ जुड़े रहें, मेरे इस ब्लॉग को लाइक और फॉलो करते रहेंl



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