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Monday, 24 July 2023

प्रयागराज

अगर पुराने जमाने की नगर देवता की और ग्राम देवता की कल्पनाये आज भी मान्य होती 
तो मै कहता की इलाहाबाद का नगर देवता जरूर कोई रोमांटिक कलाकार है ऐसा लगता है 
इस शहर की बनावट, गठन,ज़िंदगी और रहन-सहन मे कोई बंधे - बँधाये नियम नही है , 
कही कोई कसाव नही है , हर जगह  एक स्वछंद खुलाव ,एक बिखरी हुये सी अनियमितता 
बनारस की गलियो से भीं पतली गलिया और लखनऊ की सड़कों से चौड़ी सड़के। यार्कशायर 
और ब्राइटन के उपनगरो का मुक़ाबला करने वाले सिविल लाइंस और दलदलों की गंदगी को
मात  करने वाले मुहल्ले । मौसम  मे भी कोई सम नही , कोई संतुलन नही ।

  सुबहे मलयजी ,
दोपहरे अंगारी , तो शामे रेशमी !धरती ऐसी की सहारा की रेगिस्तान की तरह बालू भी मिले ,
मालवा की तरह हरे भरे खेत भी मिले और ऊसर और परती की भी कोई कमी नही ।  सचमुच 
लगता है प्रयाग का नगर देवता स्वर्ग की कुंजियों से निर्वासित कोई मनमौजी कलाकार है
जिसके सृजन मे हर रंग के डोरे है । 
और चाहे जो हो मगर इधर क्वार-कार्तिक तथा उधर बसंत के बाद और होली के बीच के मौसम 
से इलाहाबाद का वातावरण नईत्सशीर्यम और पैनजी के फूलो से भी ज्यादा खूबसूरत और 
आम के बौरों की खुशबू से भी ज्यादा महकदार होता है । सिविल लाइंस हो या अल्फ्रेड पार्क ,
गंगातट हो या खुसरूबाग लगता है की हवा एक नटखट दोशीजा की तरह कलियो के आँचल 
और लहरों  के मिजाज से छेङ्खनी करती चलती है और अगर आप सर्दी से बहुत  नही डरते तो ☝
आप जरा एक ओवेरकोट डालकर सुबह सुबह घूमने निकाल जाए। 
प्रयागराज
प्रयागराज

 
तो इन खुली हुई जगहो की फिजा इठलाकर आपको अपने जादू मे बांध लेगी ।खासतौर से 
पौ फटने के पहले तो आपको एक बिलकुल नई अनुभूति होगी । बसंत के नये नये मौसमी 
फूलो के रंग से  मुक़ाबला करने वाली हल्की सुनहली , बाल सूर्य की अंगुलिया , सुबह की
 राजकुमारी के  गुलाबी वक्ष पर  बिखरे हुये भौराले गेसूओ को धीरे धीरे हटाती जाती है और 
क्षितिज पर सुनहली तरुणाई बिखर पड़ती है ।
                                                                   ----चर्चित  

Tuesday, 15 June 2021

पं० रामनाथ पाठक

प्रख्यात स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं पूर्वविधायक स्वपं० रामनाथ पाठक की 26वीं पुण्य तिथि पर कोटिश: नमन।।
अविभाजित जनपद मीरजापुर के ग्राम पसही कलां के मूल निवासी भारत माता के अमर सपूत पूज्य पंडित रामनाथ पाठक जी का जन्म वर्ष 1912 की श्रावण शुक्ला सप्तमी को लसडा गावँ में हुआ था। अल्पायु मे ही इनके पिता की मृत्यु होने से घर- गृहस्थी के दायित्व के साथ-साथ आप देश मे चल रहे भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन से जुड़े तथा वाराणसी मंडल मे क्रांतिकारी विचार वाले  नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के अनुयायियों के साथ आन्दोलन को  गतिमान बनाने में लग गए।
             वर्ष 1936 मे आपने काग्रेस पार्टी की सक्रिय सदस्यता ग्रहण की। स्वतंत्रता संग्राम आन्दोलन मे वर्ष 1941-42 मे आप जेल गए जहाँ इन्हें नजरबंद कर तनहाई मे रखा गया व कठोर यातनाए दी गई।    देश की स्वतंत्रता के पश्चात वर्ष 1962 मे रावर्टसगंज व वर्ष 1967 मे राजगढ विधान सभा से आप दो बार अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी से  विधायक रहे तथा जनपद मीरजापुर एवं सोनभद्र मे लोक कल्याण के लिए अविस्मरणीय सेवा की।तत्कालीन मुख्यमंत्री गोविन्द वल्लभ पंत से प्रयास कर आपने जिले को बुन्देलखण्ड के समान सुविधाओं का लाभ   दिलाया।वर्ष 1952 मे भुखमरी के कारण  हुई मौतों के आधार पर मीरजापुर जिले को अकालग्रस्त घोषित कराना, वर्ष  1954 मे राजकीय सीमेंट फैक्ट्री चुर्क का उदघाटन प्रधानमंत्री  नेहरूजी ने किया था जिस समारोह की अध्यक्षता आपने की थी।
नेहरूजी से आग्रह कर आपने सीमेंट कारखाने मे नौकरी हेतु स्थानीय लोगों को विशेष प्राथमिकता दिलवाई थी जिससे सैकड़ों जनपदवासियो को रोजी-रोटी मिली।जन कल्याण हेतु आपके प्रयास से जसौली मे सिंचाई हेतु नगवा बाॅध से नहरों का निर्माण, दुद्धी तहसील मे लोहा,कोयला व सीमेंट  विक्री हेतु स्थानीय स्तर पर सरकारी दुकानों का आवंटन,रावर्टसगंज को अलग जिला बनाने हेतु विधान सभा मे पहल,प्राथमिक विद्यालयों मे तदर्थ नियुक्ति हेतु मात्र कक्षा 5 उत्तीर्ण स्थानीय लोगों कोअध्यापक बनवाने हेतु तत्कालीन मुख्यमंत्री चन्द्रभानु गुप्त द्वारा विशेष  शासनादेश दिलाकर सैकड़ो अध्यापको की नियुक्ति,  वर्ष 1963 मे रिहन्द जल विद्युत परियोजना के शुरू कराने का कार्य,वर्ष 1967 मे प्रधानमंत्री इन्दिरा गाँधी जी के साथ भयंकर अकालग्रस्त सम्पूर्ण जिले के दौरे मे उनके  साथ रहकर स्थलीय निरीक्षण करवाया ।जिससे  अनेकों तालाब व सड़कों के निर्माण राहत कार्य द्वारा हुए। 1972 मे हुए मध्यावधि चुनाव में मुख्यमन्त्री कमलापति त्रिपाठी के पुत्र लोकपति त्रिपाठी  को राजगढ विधान सभा से पहली बार विजयी बनाने मे महती भूमिका निभाई।स्वतंत्रता दिवस  की रजत जयंती पर स्वतंत्रता संग्राम मे देश की स्मरणीय सेवा हेतु 15 अगस्त 1972 को प्रधानमंत्री इन्दिरा गाँधी ने ताम्र पत्र प्रदान कर आपको सम्मानित किया  तथा राज्य व केंद्र  सरकार से आजीवन स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पेंशन से मानवर्धन किया ।
 पाठक जी का भरा-पूरा परिवार उनके पुण्य प्रताप से है।आपकी दो पुत्रियां अपने सफल गृहस्थ जीवन का संपूर्ण निर्वहन कर दुर्भाग्यवश अब परलोकवासिनी हुईं व आपके एकमात्र पुत्र डाक्टर श्री मार्कण्डेय राम पाठक काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में 37 वर्षों की सक्रिय सेवा मे संयुक्त कुल सचिव व वित्त अधिकारी पद से 2017 मे सेवानिवृत्ति के पश्चात ।
अब संयुक्त कुल सचिव विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षाओं के पद पर पुनर्नियोजित है एवं अपने प्रशासनिक गुरूतर दायित्वों का कर्तव्यनिष्ठ सेवाभाव से संपादन कर रहे हैं। पाठक जी की तीनों पौत्रियां शादीशुदा होकर सुखपूर्वक अपनी गृहस्थी में रमी हैं व पाठक के जी के दो पौत्रों में से बड़े पौत्र कौशलेश पाठक काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से बीए,एल एल बी कर सम्प्रति जिलाध्यक्ष कांग्रेस सेवादल हैं व अपने पूज्य पितामह के पदचिन्हों पर चल रहे हैं। छोटे पौत्र शैलेश पाठक बीएससी (कृषि),एमबीए(एग्रीबिजनेस -गोल्ड मेडल ) सम्प्रति देश की प्रतिष्ठापरक डेयरी -आनन्दा मे उप महाप्रबंधक  पद पर सेवारत हैं। 
ऐसे पुण्यात्मा,देश सेवाव्रत को जीवन पर्यंत मनसा-वाचा-कर्मणा अपनी दिनचर्या में समाहित करने वाले, भारतमाता के अमर सपूत पूज्य पंडित रामनाथ पाठक जी ने जीवन की अंतिम सांस वाराणसी मे 15 जून 1995 को ली एवं उन्हें शिव-सायुज्य मोक्ष मिला।
कीर्तिरयस्य स जीवति। परम पूज्यनीय पाठक जी को 
हमारी  विनम्र श्रद्धांजलि एवं शत-शत नमन।

1857 की क्रांति का इतिहास

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