Tuesday, 15 December 2020

अन्नदाता है ये चौकिदार नही !

 


सत्ता गलियारो के हुंकार को कुचलने "किसान" चल पड़ा है ।

ये जो लंगर देख रहो न तुम "नमो" सड़को पर ये आन्दोलन नही

आत्मविश्वास है धरती मां के पुतो‌ का ......कोई अडानी, अम्बानी नही राज कर सकता हमारे देश पर 

यहीं इस लोकतांत्रिक भारत की गरीमा है।

और ये आन्दोलन तुम तो क्या कोई भी नही खत्म कर सकता

उनको डरा रहे हो पानी की बौछार से ,


जो करते हैं "कुल्ला" भी ट्यूबवेल की धार से ,

।।किसान एकता जिन्दाबाद।।


<script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-2081471323648969"

     crossorigin="anonymous"></script>


1 comment:

1857 की क्रांति का इतिहास

  1857 की क्रांति का इतिहास 1857 की क्रांति, जिसे भारत के पहले स्वतंत्रता संग्राम के रूप में जाना जाता है, भारतीय उपमहाद्वीप में ब्रिटिश औपन...