Wednesday, 16 June 2021

राजमाता जीजाबाई

           
जीजाबाई (1594-1674) महान मराठा शासक और योद्धा शिवाजी की माता जी थी।शिवाजी मुगल साम्राज्य के खिलाफ मजबूती से लड़े और हिंदवी स्वराज की स्थापना की। जीजा बाई का जन्म 1594 ई० में महाराष्ट्र के गांव सिंधखेड़ में हुआ था उनके पिता शाही दरबारी और प्रमुख मराठा सरदार थे जिनका नाम लखुजी जाधवराव था, जबकि उनकी माता का नाम म्हालसा बाई था। उनके पिता अहमदनगर में निजामशाही की सेवा करते थे और उन्हें अपने ऊंचे रुतबे और पद पर गर्व थाा। जीजाबाई की शादी बहुत कम उम्र में हो गई थी।

उस कालखंड के रीति रिवाज के मुताबिक उनका विवाह शाहजी भोंसले से हुआ। शाहजी निजाम शाह के दरबार में राजनयीक पद संभालते थेे। वह एक बेहतरीन योद्धा भी थेे।
शाहजी भोंसले के पिताजी का नाम मालोजी शिलेदार था जो बाद में तरक्की पाते हुए सरदार मालोजी राव भोसले बन गए वैसे तो दंपत्ति का वैवाहिक जीवन बेहद सुखद था लेकिन उनके परिजनों की आपस में टकराहट ने तनाव को जन्म दिया। शाहजी राजे और उनके ससुर जाधव के आपसी रिश्ते बिगड़ गये।


हालात इतने बिगड़ चुके थे जीजाबाई पूरी तरह टूट गई थी। उन्हें अपने पति और पिता मे से एक का पक्ष लेना था उन्होंने पति का साथ दिया।
जीजाबाई अपने पति के साथ शिवनेरी के किले में ही रही।उनके प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई हालांकि,उन्हें इस बात का दुख था कि उनके पिता और पति दोनों किसी और शासक के अधीन काम करते हैं। उनकी इच्छा थी कि मराठों का अपना साम्राज्य स्थापित हो। दोनों की 8 संताने हुयी 2 लड़के और 6 बेटियां शिवाजी उनके दो बेटों में से एक थे। वह हमेशा भगवान से प्रार्थना करती थी कि उन्हें एक ऐसा बेटा मिले जो मराठा साम्राज्य की नींव रख सके। उनकी प्रार्थनाओं का जवाब शिवाजी के तौर पर मिला जिन्होंने मराठा साम्राज्य की स्थापना की।
जीजाबाई को एक प्रभावी और प्रतिबद्ध महिला के तौर पर जाना जाता है। जिसके लिए आत्म सम्मान और उनके मूल्य सर्वोपरि हैं। अपनी दूरदर्शिता के लिए प्रसिद्ध जीजाबाई खुद एक योद्धा और प्रशासक थी। उन्होंने बढ़ते शिवाजी में अपने गुणों का संचार किया।शिवाजी में कर्तव्य भावना,साहस और मुश्किल परिस्थितियों का सामना साहस के साथ करने के लिए मूल्यों का संचार किया।उनकी  देख-रेख और मार्गदर्शन में शिवाजी ने मानवीय रिश्तो की अहमियत समझी महिलाओं का मान सम्मान,धार्मिक सहिष्णुता और न्याय के साथ ही अपने राष्ट्र के प्रति प्रेम और महाराष्ट्र की आजादी की इच्छा बलवती हुई।


शिवाजी भी अपने सभी सफलताओं का श्रेय अपनी मां को देते थे,जो उनके लिए प्रेरणास्रोत थीं। उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी अपने बेटे को मराठा साम्राज्य का महानतम शासक बनाने पर लगा दी।
वह शिवाजी और उनके साथियों की सफलता देखकर गर्वित होती थी। जीजा बाई का सपना उस समय पूरा हुआ। जब उनकी आंखों के सामने उनके बेटे का राज्य अभिषेक समारोह संपन्न हुआ। 1674 में शिवाजी का राज्याभिषेक हुआ और वह मराठा साम्राज्य की नींव रखने वाले महाप्रतापी राजा बने।


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