Tuesday, 15 August 2023
रामायण क्या है ?
वेद जिस परम तत्व का वर्णन करते है, वही श्रीमत्रारायनतत्व श्रीमद्रामअयनो मे श्री राम रूप से निरूपित है ।
वेद्वेद्द परमपुरूर्सोत्तम के दशरथनन्दन श्री राम के रूप मे अवतीर्ण होने पर साक्षात वेद ही श्री वाल्मीकि के मुख
से श्री रामायण रूप मे प्रकट हुये , ऐसी आस्तिकोंकी चिरकाल से मान्यता है इसलिए श्रीमद वाल्मीकि रामायण की
वेदतुल्य ही प्रतिस्ठा है यों भी महर्षि वाल्मीकि आदिकवि है , अत विश्व के समस्त कवियों के गुरु है । उनका
'आदिकाव्य ' श्रीमदवाल्मिकीय रामायण भू तल का प्रथम काव्य है वह सभी के लिए पूज्य वस्तु है और देश की
सच्ची बहुमूल्य राष्ट्रीय निधि है इस नाते भी वह सबके लिए संग्रह पठन मनन एवं श्रवण करने की वस्तु है इसका एक एक
अक्षर महापातक का नाशं करने वाला है
एकैकमक्षर पुंसां महापातकनाशनम
यह समस्त काव्यो का बीज है ---
काव्यबीजं सनातनम
श्री व्यासदेव जी एवं सभी कवियों ने इसका अध्ययन कर पुराण,महाभारतदिका निर्माण किया 'वृहद्म्पुरान' में यह बात विस्तार से
प्रतिपादित है श्रीव्यास जी ने अनेक पुराणों में रामायण का माहात्म्य गाया है स्कन्दपुराण का रामायणमहात्यम तो इस ग्रंथ के
आरम्भ में दिया ही है कई छिट- पुट माहात्म्य अलग भी है यह भी प्रसिद्ध है की व्यास जी ने युधिष्ठिर के अनुरोध से एक व्याख्या
वाल्मीकिरामायण पर लिखी थी और उसकी एक हस्तलिखित प्रति अब भी प्राप्य है इसका नाम रामायणतात्पर्यदीपिका है इसका उल्लेख
"दिवानबहादुर रामशास्त्री " ने अपनी पुस्तक स्टडीज इन रामायण के द्वितीय खण्ड में किया है ह पुस्तक १९४४ ई. में बड़ोदा से प्रकाशित है
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